यह एक अव्यवसायिक ब्लॉग/पत्रिका है. इस पर मौलिक रचनाएं प्रकाशित है. कृपया इसे किसी फोरम पर न दिखाएँ क्योंकि यह ब्लॉग नहीं है बल्कि इसे संग्रहक के रूप में प्रयोग किया जा रहा है. लेखक संपादक-दीपक भारतदीप,ग्वालियर
Thursday, October 5, 2017
सफेदपोशों की पूंछ कातिलों ने पकड़ी है-दीपकबापूवाणी (Safedposhon ki poonch katiolon ne pakdi ha9i-DeepakBapuWani)
Friday, February 24, 2017
सेवक बनकर सामान ले जाते हैं-दीपकबापूवाणी (Sewak banakar saman le jaate hain-DeepakbapuWani)
Sunday, September 25, 2016
समंदर जैसी चौड़ी सड़क पर कारों का झुंड खड़ा है-दीपकबापूवाणी (Samandar jaise chodi Sadak pa karon ka jhund khada hai-DeepakBapuwani)
Tuesday, August 16, 2016
मौसम और मन के मिजाज-हिन्दी कविता (mausa aur man ki Mijaj-HindiPoem)
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साथ चलते इंसान
परिंदों की तरह उड़ गये।
उनकी यादों ने
कुछ देर परेशान किया
फिर नये राही जुड़़ गये।
कहें दीपकबापू हम भी
खड़े देखते रहे
मौसम और मन के मिजाज
धूप से लड़ने की ठानी
कभी छांव की तरफ भी मुड़ गये।
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जीवन पथ परसहयात्री की खोजआंखे करती हैं।बहुत नरमुंड मिलतेउनकी इच्छायें ही साथीहमेशा आहें भरती हैं।कहें दीपकबापू याद मेंकिसे बसाकर अपना दिल बहलातेहृदय की भावनायेंनयी चाहत पर मरती है।--------------
भिखारी और राजा-हिन्दी कविता (King and begger-Hindi Poem)
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मतलब की बात
जल्दी सुनते
वरना बहरे हो जाते हैं।
डराते जो ज़माने को
खौफ में जीते वह भी
उनके घर खड़े पहरे हो जाते हैं।
कहें दीपकबापू सरलता से
जीवन बिताने की आदत
बना देती धरती पर स्वर्ग
चालाक अंदाज से
दुश्मन गहरे हो जाते हैं।
------------
Sunday, February 24, 2013
किराये पर मिली खुशी जोश नहीं देती-हिन्दी कविता (kiraye par milee khushi josh nahin dete-hindi poem)
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Friday, November 5, 2010
टूटी नीयत, खूबसूरत चेहरा-हिन्दी व्यंग्य कविता (kharab neeyat,khubsurat chehra-hindi satire poem)
तब एक को समझौते का ख्याल आया,
उसने दूसरे को समझाया,
''यार, अब बदल गया है ज़माना,
मुश्किल हो गया है कमाना,
क्यों न आपस में समझौता कर लें,
भले ही मन में हो खोट रखें
बाहर से एकरूप और विचारधारा धर लें.."
सुनकर दूसरा बोला
"सच कहते हो यार,
बरबाद हो गयी है हर धारा
बिगड़ गया है हर विचार,
अपने आका दल क्या
दिल ही बदल देते हैं,
अवसर जहां देखते हैं मिलने का सम्मान
वहीँ अपनी किस्मत खुद लिख देते हैं,
कविताई के नाम पर
एकता, भाईचारा, और अमन के पैगाम लिखते हैं,
बिकने पर माल के लिए
दारू पीकर लड़ते दिखते हैं,
अपने हिस्सा नहीं आ रहा नामा और नाम,
इस तरह तो छूट जाएगा कविताई का काम,
अपने मसीहाओं की तरह टूटी नीयत रखें
बाहर से एकता, अमन और भाईचारे का
खूबसूरत चेहरा धर लें.."
__________________
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
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Friday, August 27, 2010
हादसों पर मेले-हिन्दी शायरी (hadson par mele-hindi shayari
हर बरस मोमबत्तियां जलायेंगे,
तो कुछ जन्नत के फरिश्ते
जख्मों में मरहम लगाने के लिये
सर्वशक्तिमान का नया दरबार बनायेंगे।
इंसान मौत से हारे हैं,
ईमान से अधिक उनको अपने मतलब प्यारे हैं,
कभी नहीं समझा धर्म,
अपनी कमजोरी पर आती है शर्म,
फिर भी अपनी अक्लमंदी से बन गये
जो सर्वशक्तिमान के ठेकेदार
मुर्दों में अमरत्व दिखाने के लिये
पत्थर की कुछ नई इमारते सजायेंगे।
---------------------------
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Saturday, August 21, 2010
, ईमान से अधिक उनको अपने मतलब प्यारे- हिन्दी व्यंग्य कविता
हर बरस मोमबत्तियां जलायेंगे,
तो कुछ जन्नत के फरिश्ते
जख्मों में मरहम लगाने के लिये
सर्वशक्तिमान का नया दरबार बनायेंगे।
इंसान मौत से हारे हैं,
ईमान से अधिक उनको अपने मतलब प्यारे हैं,
कभी नहीं समझा धर्म,
अपनी कमजोरी पर आती है शर्म,
फिर भी अपनी अक्लमंदी से बन गये
जो सर्वशक्तिमान के ठेकेदार
मुर्दों में अमरत्व दिखाने के लिये
पत्थर की कुछ नई इमारते सजायेंगे।
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रौशनी चुराकर अंधेरों को सुलाने लगे-हिन्दी व्यंग्य कविता (vikas ka mukhauta-hindi satire poem)
अंधेरों को वहां सुलाने लगे,
नौनिहालों के दूध में जहर मिलाकर
अपनी दौलत से अपना कद
ज़माने को दिखाने के लिये
ऊंचा उठाने लगे।
इंसानों जैसे दिखते हैं वह शैतान
पेट से बड़ी है उनकी तिजोरी
जंगलों की हरियाली चुराकर
भरी है नोटों से उन्होंने अपनी बोरी,
अब गरीबी और बेबसी को
विकास का मुखौटा पहनाकर बुलाने लगे।
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Saturday, March 27, 2010
खबरें और यकीन-हिन्दी व्यंग्य कविता (news and faith-hindi satire poem)
क्योंकि वह शब्द बदल सामने आती रहीं।
कहीं चेहरे बदले
तो कहीं चालें
पर चरित्र पुराना ही दिखाती रहीं।
नतीजे पर नहीं पहुंचा कोई मुद्दा
पर खबरें बरसों तक चलती रहीं,
कहीं बाप की जगह बेटे का नाम लिखा जाने लगा
कहीं बेटियों के नाम भरती रहीं,
कभी कभी प्रायोजक बदलकर भी
खबरे सामने आती रहीं।
----------
मुद्दा सामने पड़ा था,
पर खबरची उसे छोड़ने पर अड़ा था।
क्योंकि कोई प्रायोजक पास नहीं खड़ा था।
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Sunday, February 28, 2010
ब्लाग जगत पर होली व्यंग्य-हिन्दी लेख (hindi satire wrote on holi-hindi article)
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Sunday, February 21, 2010
प्यार और तोहफा-हिंदी व्यंग्य शायरी (ishq aur tohfa-hinci satire poem)
तोहफों से चलने लगा है,
इसलिये आदमी तोहफे देकर
हर इंसान प्यार खरीदने लगा है।
तोहफों की कीमत जितनी बढ़ेगी,
प्यार की ऊंचाई भी उतनी लगेगी,
नजरों का दोष है कि दिल का
प्यार जाहिर करने की ख्वाहिशों के आगे
हर तोहफा सस्ता लगने लगा है,
मगर मजबूरी है
बिना तोहफे के प्यार खाली लगने लगा है।
मुश्किल यह है कि
प्यार दिखाने के लिये तोहफा खरीदने वास्ते
कब तक पतंग की तरह
इधर उधर उड़ते रहें,
कीमत चुकाने के लिये
कमाने के दर्द कब तक सहें,
सरलता से किया जाने वाला प्यार
तोहफों के जाल में फंसने लगा है।
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खूबसूरती की दौड़ में-हिन्दी हास्य कवितायें (hindi comic poem)
सौंदर्य का पर्याय बन गये हैं,
भयानक चेहरे भी
खूबसूरती की दौड़ में भागने के लिये बनठन गये हैं।
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न राई थी, न पहाड़ था,
न तिल था, न ताड़ था,
फिर भी वह ख्वाब बेचकर
सौदागरों ने पैसा कमाया।
इसतर बड़े ठग ने
छोटे पर रुआब जमाया।
कौन करेगा फरियाद,
सभी दे रहे एक दूसरे को दाद,
न अच्छे रास्ते पैसा मिला
न अच्छी जगह गंवाया।
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अब यह प्रश्न न पूछना कि
हर शाख पर उल्लू बैठा है
अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा।
उजड़े चमन में
बिगड़े लोगों के वतन में
बरबादी का मंजर चारों तरफ है
अब तो प्रश्न यह है उल्लूओं का क्या होगा?
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वहम-हिन्दी क्षणिकाऐं (vaham-hinci comic poem)
नर्तकों के देवता होने का वहम
पूरे ज़माने को हो गया है,
झूठ के सहारे खड़ा है दौलत का महल,
इज्जत पाने के लिये, होने लगी सौदे की पहल,
ईमान सभी का सो गया है।
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सर्वशक्तिमान ने दाने दाने पर लिखा है
खाने वाले का नाम
न मिलने पर उसका क्या दोष
अगर बंद हो गोदाम।
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अपने बताये रस्ते पर चलें,ऐसे लोग कम हैं-हिंदी व्यंग्य कविता (few men in world-hindi comic poem)
दूसरे को सिखायें दांवपैंच, जो अजमाने में खुद बेदम हैं।।
हवा के झौंके से कांपने लगता है पूरा उनका बदन,
जमाने को डरपोक बतायें, अपनी बहादुरी के उनको वहम हैं।।
दूसरों की रौशनी में चले हैं पूरी जिंदगी का रास्ता,
दीपक और मशाल जलायें रोज, ऐसे लोग कम हैं।।
सह नहीं पाते दूसरे की खुशी, दुखी हो जाते हैं,
अपने मतलब की राह चले हैं वह, जहां ढेरों गम हैं।
तलवारें और ढाल थामें हैं चारों ओर लोग
कलम से शब्द लिखकर अमन लायें, ऐसे लोग कम हैं।
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Sunday, February 7, 2010
ज्ञानी और ईमानदारी-हिन्दी व्यंग्य कवितायें
दिन भर वह दोनों ज्ञानी
अपने शब्दों की प्रेरणा से
लोगों को लड़ाने के लिये
झुंडों में बांट रहे थे,
रात को ईमानदारी से
लूट में मिले सामान में
अपना अपना हिस्सा
ईमानदारी से छांट रहे थे।
-------
शब्द रट लेते हैं किताबों से,
सुनाते हैं उनको हादसों के हिसाबों से,
पर अक्लमंद कभी खुद जंग नहीं लड़ते।
नतीजों पर पहुंचना
उनका मकसद नहीं
पर महफिलों में शोरशराबा करते हुए
अमन की राह में उनके कदम
बहुत मजबूती से बढ़ते।
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चिल्लाने की बारी -हिन्दी व्यंग्य कविता (hindi comic satire poem)
अत्याचार
और व्याभिचार को भी
जाति, भाषा और धर्म के नाम पर
बांटने की कोशिश जारी है,
अक्लमंद दिखाते हैं बहादुरी
अपने अपने हिस्से की शिकायतें उठाने में
शब्द खर्च करते
दूसरे की कमियां गिनाने में
हर हादसे पर देखते हैं बस यही कि
किसके चिल्लाने की बारी है।
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कला, मनोरंजन, शायरी, शेर, समाज, हिन्दी साहित्य
Sunday, January 3, 2010
आशिक माशुका ब्लागर और नववर्ष-हिन्दी हास्य कविता (love couple blogger and new year-hindi hasya kavita)
आशिका और माशुका ने मिलकर
अपने एकल और युगल ब्लाग पर
खूब पाठ लिखे,
कभी सप्ताह भर तो
कभी माह बाद दिखे
साल भर कर ली जैसे तैसे लिखाई।
साल के नंबर वन के ब्लागर का
खिताब पाने की दोनों को ललक थी
पर कहीं सामुदायिक ब्लागर पर भी
दाव चल जाये इसलिये
युगल ब्लाग भी लिखते थे,
कभी प्यार तो, कभी व्यापार पर तो,
कभी नारीवाद पर भी की खूब लिखाई।
नव वर्ष के पहले दिन ही
सुबह आशिक ब्लागर ने
माशुका के फोन की घंटी बजाई।
नींद से उठी माशुका ने भी ली अंगड़ाई।
उधर से आशिक बोला
‘नव वर्ष की हो बधाई’,
माशुका ने बिना लाग लपेटे के कहा
‘छोड़ो सब यह बेकार की बात
यह तो ब्लाग पर ही लिखना,
अब तो नंबर वन के लिये कोशिश करते दिखना,
बहुत जगह बंटेंगे पुरस्कार
इसलिये तुम मेरा ही नाम आगे करना,
मैंने दूसरे लोगों से भी कहा है
वह भी मेरे लिये वोट जुटायेंगे
लग जाये शायद मेरे हाथ कोई इनाम
जब लोग लुटायेंगे,
वैसे तुम अपने नाम की कोशिश मत करना
क्योंकि हास्य कविताओं के कारण
तुम्हारी छवि अच्छी नहीं है
तुम्हारा मन न खराब हो
इसलिये तुम्हें यह बात नहीं बताई।’
‘अरे, यह क्या चक्कर है
मैंने तुम्हें पास से कभी नहीं देखा
फोटो देखकर ही पहचान बनाई,
अब तुम कैसी कर रही हो चतुराई।
क्या इसी नंबर वन के लिये
तुमने यह इश्क की महिमा रचाई।
मैं लिखता रहा पाठ पर पाठ
तुमने वाह वाह की टिप्पणी सजाई।
अब आया है इनाम का मौका तो
मुझे अपनी औकात बताई।
वैसे तुमने भी क्या लिखा है
सब कूड़े जैसा दिखा है
शुक्र समझो मेरी टिप्पणियों में बसे साहित्य ने
तुम्हारे पाठ की शोभा बढ़ाई।
अब मुझे अपना हरकारा बनने के लिये
कह रहे हो
तुम ही क्यों नहीं मेरा नाम बढ़ाती
करने लगी हो मुझसे नंबर वन की लड़ाई।’
‘बंद करो बकवास!
तुमसे अधिक टिप्पणियां तो
मेरे ब्लाग पर आती हैं
तुम्हारी साहित्यक टिप्पणियों पर
मेरी सहेलियों ने मजाक हमेशा उड़ाई।
वैसे तुम गलतफहमी में हो
तुम जैसे कई पागल फिरते हैं अंतर्जाल पर
मैंने सभी पर नज़र लगाई।
एक नहीं सैंकड़ों मेरे नंबर वन के लिये लड़ेंगे
सभी तमाम तरह से कसीदे पढेंगे,
तुम अपना फोन बंद कर दो
भूल जाओ मुझे
तुम्हारे बाद वाले का भी फोन आयेगा
वही मेरी नैया पार लगायेगा
तुम चाहो तो बन जाओ भाई।’
इधर आशिक ब्लागर आसमान की तरफ
आंखें कर लगभग रोता हुआ बोला
‘हे सर्वशक्तिमान यह क्या किया
इश्क रचा तो ठीक
पर नववर्ष की परंपरा क्या बनाई,
जिससे इश्क में मैंने पाई विदाई।।
नोट-यह एक काल्पनिक हास्य कविता मनोरंजन की दृष्टि से लिखी गयी है। इसक किसी घटना या व्यक्ति से कोई लेना देना नहीं है। किसी की कारिस्तानी से मेल हो जाये तो वही इसके लिये जिम्मेदार होगा।
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Saturday, December 26, 2009
बड़े लोगों की बड़ी बातें-हिन्दी व्यंग्य कविताएं (matter of top class men-hindi satire poem)
बड़े लोगों की होती है बड़ी बातें।
छोटा तो दिन में भी
छोटी शर्म का काम करते भी घबड़ाये
बड़ा आदमी गरियाता है
गुजारकर बेशर्म रातें।।
----------
छोटे आदमी की रुचि
फांसी पर झूले
या लजा तालाब में डूबे
बड़ा आदमी अपनी रातें गरम कर
कुचलता है कलियां
फिर झूठी हमदर्दी जताये।
बड़े आदमी की विलासता भी
लगाती उसके पद पर ऊंचे पाये।
---------
हर जगह बड़े आदमी की शिकायत
बरसों तक कागजों के ढेर के नीचे
दबी पड़ी है।
छोटे की हाय भी
उसके बीच में इंसाफ की उम्मीद लिये
जिंदा होकर सांसें अड़ी है।
बड़े लोग हो गये बेवफा
पर समय की ताकत के आगे
हारता है हर कोई
हाय छोटी है तो क्या
इंसाफ की उसकी उम्मीद बड़ी है।
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप
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WordPress.com Changelog: A New Hosting Dashboard, a ChatGPT Plugin, and WordPress 7.1 - WordPress.com’s latest updates include a redesigned Hosting Dashboard, a new ChatGPT plugin, WordPress 7.1, and practical improvements for users.1 week ago
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हम भारत, भारती, और भारतीयता के संवाहक हैं और धर्मनिरपेक्षता तामस गुण की पहचान है(भाग एक) we have an Bharat.,Bharati, bhartiyata Thought, Seculisma is Tanasi type (part-1) - पहले तो प्रश्न यह है कि क्या हम सर्वधर्म समभाव की विचाराधारा से सहमत हैं? जवाब अगर हां है तो फिर यह समझाना पड़ेगा कि धर्म का आशय क्या है? भारत विश्वगुरु है...6 years ago
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मत का अधिकार था भगवान हुए मतदाता-दीपकबापूवाणी (Matadata ka Adhikar thaa Bhagwan hue Matdata-DeepakBapuwani) - *---ज़माने पर सवाल पर सवालसभी उठाते, अपने बारे में कोई पूछे झूठे जवाब जुटाते।‘दीपकबापू’ झांक रहे सभी दूसरे के घरों में, गैर के दर्द ...7 years ago
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मनचलों में राजा होने का भ्रम है-दीपकबापूवाणी (Manchalon mein raja hone ka Bhram hai-DeepakbapuWani) - *मनचलों में राजा होने का भ्रम है,* *किसी के हाथ लट्ठ किसी के बम है।* *काम में नकारा मुंह चलाते* *‘दीपकबापू’ बाजूओं में नहीं दम है।* *----* *सड़क पर खड़ा हो बौ...7 years ago
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भ्रमजाल फैलाकर सिंहासन पा जाते-दीपकबापूवाणी (bhramjal Failakar singhasan paa jaate-DeepakbapuWani - *छोड़ चुके हम सब चाहत,* *मजबूरी से न समझना आहत।* *कहें दीपकबापू खुश होंगे हम* *ढूंढ लो अपने लिये तुम राहत।* *----* *बुझे मन से न बात करो* *कभी दिल से भी हंसा...7 years ago
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पर्यावरण में विष घोलकर विकास की बात करते हैं-दीपकबापूवाणी (Vish Gholkar vikas ki baat karte hain-DeepakbapuWani) - *नेता अभिनेता प्रचार के लिये बोलें,* *हर रस मे अपने शब्द घोलें।* *ंभाषा के अलंकार भूलते* *अर्थ के नाम पर अनर्थ खोलें।* *---* *राम नाम पर सत्ता का सुख लूट,* ...7 years ago
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दूसरे की फिक्र से कमाते हैं-दीपकबापूवाणी (Doosre ki Fikra se kamate hain-DeepakBapuWani) - *बेकारी के जो सताये हैं,* *राजमार्ग पर चले आये हैं।* *‘दीपकबापू’ दिल बहला लेते* *वादों का पिटारा जो वह लाये हैं।* *---* *वादों के व्यापारी हमदर्द वेश धरेंग...8 years ago
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पश्चिमी दबाव में धर्म और नाम बदलने वाले धर्मनिरपेक्षता का नाटक करते रहेंगे-हिन्दी लेख (Convrted Hindu Now will Drama As Secularism Presure of West society-Hindi Article on Conversion of Religion) - हम पुराने भक्त हैं। चिंत्तक भी हैं। भक्तों का राजनीतिक तथा कथित सामाजिक संगठन के लोगों से संपर्क रहा है। यह अलग बात है ...8 years ago
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आनंद उठाने का सबसे अच्छी तरीका यह है कि आप एकांत में जाकर ध्यान लगायें-चिंत्तन (Anand Uthane ka tareeka-Chinttan) - रोकड़ संकट बढ़ाओ ताकि मुद्रा का सम्मान भी बढ़ सके। --- हम वृंदावन में अनेक संत देखते हैं जो भल...8 years ago
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अभी तक पेट्रोल के भाव कम क्यों नहीं हुए, लोग अब वादों और नारों से बोर रहे रहे हैं-हिन्दी लेख (Why din not prize decrease of Petrol, log is bor from Slogen and promise-HindiArticle0 - कल पेट्रोल सस्ते होने और जीएसटी में मध्यम वर्ग के व्यवसायियों की राहत पर भक्तों के शीर्ष पुरुषों की सक्रियता ...8 years ago
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जयश्रीराम का राजनीतिकरण कौन कर रहा है-हिन्दी संपादकीय - जब देश में रामजन्मभूमि आंदोलन चल रहा था तब ‘जयश्रीराम’ नारे का जिस तरह चुनावी राजनीतिकरण हुआ उसकी अनेक मिसाल...9 years ago
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पाकिस्तान को मोदी जी से डरना ही चाहिये-संदर्भःभारत पाक संबंध-सामायिक लेख - पाकिस्तानी भले ही परमाणु बम लेकर बरसों से भारतीय हमले से बेफिक्र हैं यह सोचकर कि हम एक दो तो भारत पर पटक ही ल...9 years ago
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इंटरनेट पर हिन्दी लिखने वालों को साहित्यकार ही माने-हिन्दी लेख - प्रतिदिन कोई न कोई सम्मानीय अपना सम्मान पुराने सामान की तरह बाहर फैंक रहा है। इससे तो यही लगता है जितने साहित्यक सम्मान देश में बांटे गये ...10 years ago
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धार्मिक ग्रंथ की बात पहले समझें फिर व्यक्त करें-हिन्दी लेख - अभी हाल ही में एक पत्रिका में वेदों के संदेशों के आधार पर यह संदेश प्रकाशित किया गया कि ‘गाय को मारने या मांस खाने वाले ...10 years ago
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स्वर्ग व मोक्ष का दृश्यव्य रूप नहीं-हिन्दी लेख - हमारे देश में धर्म के नाम पर अनेक प्रकार के भ्रम फैलाये गये हैं। खासतौर से स्वर्ग और मोक्ष के नाम पर ऐसे प्रचारित किये ग...10 years ago
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मनोरंजन से अध्यात्मिक शांति बेचने का प्रयास-हिन्दी लेख - पूरे विश्व में प्रचार माध्यमों के बीच हर प्रकार के दर्शक और श्रोता को प्रभावित करने की होड़ चल पड़ी है। मनोरंजन के नाम पर अनेक तरह के कार्यक...10 years ago
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सम्मान वापसी और रचनात्मकता का वैचारिक संघर्ष-हिन्दी लेख - अब हम उन्हें दक्षिणपंथी कहें या राष्ट्रवादी जो अब पुराने सम्मानीय लेखकों के सामान वापसी प्रकरण से उत्तेजित हैं और तय नहीं कर पा रहे कि उनके प्रच...10 years ago
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हिन्दी दिवस पर दीपकबापू वाणी - हृदय धड़के मातृभाषा में, भाव परायी बाज़ार में मत खोलो। कहें दीपकबापू खुशी हो या गम, निज शब्द हिन्दी में बोलो।। ————— दिल के जज़्बात अपने हैं, अपनी जुबां हिन्...10 years ago
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अधर्मी व्यक्ति की तरक्की देखकर विचलित न हो-मनुस्मृति के आधार पर चिंत्तन लेख - विश्व के अधिकतर देशों में जो राजनीतक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्थायें हैं उनमें सादगी, सदाचार तथा सिद्धांतों के साथ विकास करते हुए उच...12 years ago
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