Friday, January 6, 2012

जिंदगी का कायदा-हिन्दी शायरी (zindagi ka kayda-hindi shayari or poem's)

आस्था का रूप
कभी बाहर दिखाया नहीं जाता,
विश्वास का दावा
कभी कागज पर लिखाया नहीं जाता।
कहें दीपक बापू
नीयत से हैं जो फरिश्ते
वह कभी
अपने काम का ढिंढोरा नहीं पीटते,
बदनीयत करते इंसान होने का दावा
मगर जज़्बातों को मतलब के लिये पीसते,
जहान को बर्बाद कर
अपने लिये एय्याशी खरीदने वालों को
जिंदगी का कायदा कभी सिखाया नहीं जाता।
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com

2 comments:

बिंदास छोरा said...

DEEPAK BHAI AAP ACCHA LIKHTE HO.....


ME EK NEWS SITE BNA RHA HOON, KYA AAP MERE SAATH KAAM KAROGE...


AUR WAISE ME BHI GWALIOR SE HI HOON, MATLAB GWALIOR K PAAS BSF CAMPUS TEKANPUR ME WAHAN SE ....

बिंदास छोरा said...

आपने मुझ तुछ प्राणी के लिए समय निकाला मेरे लिए वही बहुत है .......


वैसे भाई जी मैं एक न्यूज़ साईट बनाना चाह रहा था, मतलब बिकाऊ मीडिया साईट नहीं, जनता के लिए समर्पित साईट .........

कृपया मेरा मार्गदर्शन करें ........

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