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लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर
चाणक्य नीति दर्शन-खामोशी में बहुत बड़ी ताकत है
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इस संसार में मनुष्यों को अन्य जीवों की अपेक्षा बुद्धि तथा विवेक
की अथाह शक्ति प्राप्त है। इसके परिणामस्वरूप उसमें अहंकार का भाव भी बहुत है।
अपन...
New Theme: Ideation & Intent
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It’s almost June and warm weather is spreading across many parts of the
world like wildfire! What better time to get out of the house and explore
new place...
मनुष्य में आरोग्य का गुण होना जरूरी-विदुर नीति
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एक तरफ हमारे संचार माध्यम जहां अपने देश के आर्थिक विकास का ढिंढोरा
पीट रहे हैं दूसरी तरफ विश्व के स्वास्थ्य विशारद भारतीय समाज में मधुमेह,
हृदय रोग...
चाबुक का कमाल -हिंदी व्यंग्य कविता
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वह अपनी जान बचाने के लिए हुकूमत के पहाड़ पर चढ़ गए हैं, नीचे आकर क्या लोगों
की खातिर दुश्मनों से जंग लड़ेंगे. कहें दीपक बापू इंसानों में शेर कहलाने का
शौक स...
मरे दिलों में जज़्बातों की तलाश-हिन्दी शायरी
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अपनी आँखों से जो देखा है वह सच किसी को न बताना, अपने कानों से जो सुना नहीं
वह स्वर किसी को समझाना, अपने दिमाग में भले ही पालो सपने वह किसी के सामने न
सजाना...
उम्मीद और वफा-हिन्दी शायरी
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हमने देखा उनकी तरफ बड़ी उम्मीद के साथ शायद वह हमारी जिंदगी में कभी बहार
लायेंगे, दोष हमारा ही था कि बिना मतलब के उनका साथ निभाया, उनमें वफा करने की
कला है क...
पर्दे के दृश्य-हिन्दी कविता
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*बड़ा हो या छोटा पर्दा*
*उन पर जो दृश्य दिख रहे हैं,*
*जमाने की नज़रों में आने पहले*
*कथाकार उनको कागज पर लिख रहे हैं।*
*कहें दीपक बापू*
*समाज सेवा हो या फिल्म...
आधा आधा-हिन्दी व्यंग्य
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पचास फीसदी सफलता का अनुमान कर कोई भी काम नहीं करना चाहिए न ही
किसी खेल में शामिल होना चाहिए। कम से कम हम जैसे आदमी के लिए पचासफ़ीसदी
अनुमान के ...
खजाने भरने का मोह-हिन्दी कविता
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भूखे इंसान से भला इस दुनियाँ में कौन डरता है, सारे राह कत्ल तो हवस का गुलाम
करता है। रोटी की तलाश में हर आदमी हो जाता बेबस खजाने भरने का मोह उसमें
शैतानियत...
ज़िंदगी और दम-हिन्दी कविता
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ज़िंदगी के रास्ते पर चलना इतना आसान नहीं जितना लोग समझ लेते हैं, यही वजह है
कमजोर दिल वाले थोड़ी मुश्किल में ही अपनी दम खुद ही तोड़ देते हैं। कहें दीपक
बापू आ...
अनाम नाम-हिन्दी क्षणिकाऐं (anam nam-hindi short poem)
भ्रष्टाचार वह राक्षस है
जो शायद हवा में रहता है।
बड़े बड़े नैतिक योद्धा उसे पकड़कर
मारने के लिये तलवारें लहराते हैं,
पर वह अमर है
क्योंकि उससे मिली कमीशन से
भरी जेब का बोझ नहीं सह पाते हैं,
चल रहा है उसका खेल
हर कोई भले ही
‘उसे पकड़े और मारो’ की बात कहता है
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पहले जेबों में रहता था
अब खातों में चमकने लगा है।
भ्रष्टाचार के पहले रूप दिखते थे
पर अब बैंकों में अनाम नाम से रहने लगा है।
------------- कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें 1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका 2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका 3.दीपक भारतदीप का चिंतन 4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका 5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका
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