Wednesday, August 27, 2014

चिंता की लकीरों के बीच-हिन्दी कविता(chinta ki lakiron ke beech zindagi-hindi poem)



न महंगाई घटेगी
न भ्रष्टाचार रुकेगा
चिंताओं की लकीरों के बीच
जिंदगी यूं ही बीत जायेगी।

कोई हालातों से मजबूर है,
कोई सामानों के भंडार से भरपूर है,
जिनको हंसने की आदत नहीं
उनकी रोनी सूरत
कभी नहीं जीत पायेगी।

कहें दीपक बापू जिंदगी बिताने के
अंदाज सभी के अलग हैं
किसी ने पायी दौलत
खर्च करना आया नही,
कोई सुंदर है
बुद्धि से रिश्ता निभाया नहीं,
सच यह फांकों से भी
कर ली जिसने दोस्ती
जिंदगी उसके ही गीत गायेगी।
---------------------

दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

८.हिन्दी सरिता पत्रिका 


Tuesday, August 19, 2014

समस्याओं की चिंता-हिन्दी कविता(samasyaon ki chinta-hindi poem)



उनको देश मे
भुखमरी की समस्या पर
बहुत चिंता है।

उनको देश में
बेरोजगारी की समस्या पर
बहुत चिंता है।

उनको देश में
गरीबी की समस्या पर
बहुत चिंता है।

कहें दीपक बापू चिंता के व्यापारी
ढूंढते  हमेशा
समस्याओं के प्रचार में
नये नये साधन
विज्ञापन से हल करने के लिये
उनको भारी चंदा जुटाने की
बहुत चिंता है।
-------------
दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

८.हिन्दी सरिता पत्रिका 


Tuesday, August 12, 2014

भारत माता के घर का पता-आजादी के पर्व पर व्यंग्य कविता(bharat mata ke ghar ka pata-special hini poem on indepandent day or swantantra diwas diwas par vishesh hindi kavita)

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस का
महत्व हम नहीं समझे
या कोई हमें समझा नहीं पाया।

जिस अंग्रेजी भाषा से लड़ी हिन्दी
राष्ट्रभाषा के सम्मान के लिये
हमने उसे आज तक लड़ते पाया।

स्वदेशी का नारा लगा था
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान
खोई नहीं उसकी यादें
यदाकदा उसे अब भी सुनते पाया।

अंग्रेजों के गुलामी और मालिक के खेल
क्रिकेट को मनोरंजन का धर्म बना लिया
पागलों की तरह लोगों को
गेंद की तरह उसके पीछे भागते पाया।

आज अंग्रेजों की धरती पर गये लोग
इतराते हैं उनकी तरह
भारत को इंडिया से जूझते पाया।

कहते हैं कि जो अंग्रेजी नहीं पढ़ेगा
वह तरक्की की राह नहीं चलेगा
समझ में नहीं आता
अंग्रेजों को किसने कब कैसे क्यों और कहां
इस देश से भगाया।

कहें दीपक सभी के साथ
हम भी भारत माता की जय का
नारा लगा लेते हैं
हम ढूंढते उसका अपना घर
जिसका पता किसी ने नहीं बताया।
--------------
दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

८.हिन्दी सरिता पत्रिका 


Monday, August 4, 2014

ताज़े और नये चेहरे-हिन्दी कविता(taze aur naye chehare-hindi poem's)



जहां कभी खेत थे
समय के साथ सीमेंट और लोहे के
चमकदार मकान बन गये।

जहां कभी लगती थी चाय की गुमटी
समय के साथ पांच सितारे लिये
होटल तन गये।

जहां कभी पेड़ पौद्यों से भरे उद्यान थे
समय के साथ इतिहास में दर्ज
महान लोगों के प्रस्तर बुंत जम गये।

कहें दीपक बापू भावनायें यथावत
तब रूप बदलना
नयेपन की पहचान नहीं होती
यह अलग बात है
बाज़ार के सौदागर
बुढ़ा चुके सामानों और चेहरों पर
रंग पोतकर बना देते उनको ताजे और नये।
-----------

दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

८.हिन्दी सरिता पत्रिका 


Sunday, July 27, 2014

बुद्धिमानी का कोई भाग नहीं है-हिन्दी कविता(buddhmain ka koyee bhag nahin hai-hindi poem)



इंसानों के भावविहीन चेहरे
संवेदनाहीन व्यवहार
हृदय  में  प्रेम की आग नहीं है।

जुबान से निकलती शब्दों की भीड़
रुखे है उनके अर्थ
भावनाओं का उनमें राग नहीं है।

चमक है पहनावे में
महंगे हैं अमीरों  के बिछौने
फैला भ्रम कि उन पर कोई दाग नहीं है।

कहें दीपक बापू प्रभावी लोग भ्रमित हैं
कोई देखता नहीं उनके काले कारनामे
जिंदगी के इस खेल में
बुद्धिमानी का कोई भाग नहीं है।
--------------

दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

८.हिन्दी सरिता पत्रिका 


Thursday, July 17, 2014

जागी शख्सियत तलाश-हिन्दी कविता(jagi shakhsiyat ki talash-hindi poem;s)




मधुर कर्णप्रिय शब्द बोले
ऐसे मुख की तलाश जारी है
पर कोई बोलता नहीं है,

किसी से अपनी बात
खुलकर कह सकें
ऐसे कान की तलाश जारी है
पर कोई खोलता नहीं है,

कोई हमारे जज़्बात को समझे
ऐसे दिल की तलाश जारी है
पर शब्दों कोई तोलता नहीं है,

कहें दीपक बापू जिंदा इंसानों में
जागी शख्सियत की तलाश जारी है
मगर कोई डोलता नहीं है।
-----------------


दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

८.हिन्दी सरिता पत्रिका 


Monday, July 7, 2014

तरक्की के आसमान का पैमाना-हिन्दी व्यंग्य कवितायें(tarakki ke asman ka paimana-hindi satire poem's)



तरक्की का आसमान हमें वह दिखाते हैं,
गरीबी की बात करो तो मजबूरी में जीना सिखाते हैं।
कागज पर लिख रखे हैं उन्होंने तरक्की के पैमाने,
अपनी असलियत की बात करो तो बनते अनजाने,
रंगे हुए लोहे के सामान को जमा कर लिया है,
सब उधार का है  दिखाते जैसे कमा कर लिया है,
कहें दीपक बापू औकात की बात करो तो सीना तानते
पैसे का सवाल हो तो गरीबों की सूची में भी नाम लिखाते हैं।
----------
पता नहीं लोग कहां हुई तरक्की पर चर्चा करते हैं,
हम आज  भी हर जगह पेन से कागज पर पर्चा भरते है।
कहें दीपक बापू कागजी शेरों का हाथ में दी व्यवस्था
तरक्की बंद कर देते हैं वह अल्मारी मे
मजबूर को बेबस बनाकर जो अपना दिल भरते हैं।
--------------------------------------

दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’’
कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक 'भारतदीप",ग्वालियर 
poet,writer and editor-Deepak 'BharatDeep',Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
इस लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकायें जरूर देखें
1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

८.हिन्दी सरिता पत्रिका 


इस लेखक के समस्त ब्लॉग यहाँ एक जगह प्रस्तुत हैं

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका

दीपक भारतदीप का चिंतन